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पंचांग

आज का पंचांग: 14 फरबरी 2020; जाने आज का शुभमुहूर्त

February 14, 2020 05:46 AM

हिन्दू पंचांग पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं : 1:- तिथि (Tithi) 2:- वार (Day) 3:- नक्षत्र (Nakshatra) 4:- योग (Yog) 5:- करण (Karan)

पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे ।

जानिए शुक्रवार का पंचांग

*शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है । *वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है। * नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है। *योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है । *करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

शुक्रवार का पंचांग

7 फरवरी शुक्रवार 2020

महालक्ष्मी मन्त्र :

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

 दिन (वार) - शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।

धन लाभ के लिए इस दिन शाम के समय घर के ईशान कोण / मंदिर में गाय के घी का दीपक लगाएं। इसमें रुई के स्थान पर लाल रंग के धागे से बनी बत्ती का उपयोग करें और दिये में थोड़ी केसर भी डाल दें।

*विक्रम संवत् 2076 संवत्सर कीलक तदुपरि सौम्य*शक संवत - 1941 *अयन - उत्तरायण *ऋतु - शरद ऋतु *मास - माघ माह *पक्ष - शुक्ल पक्ष

तिथि (Tithi)- त्रयोदशी - 18:31 तक तदुपरांत चतुर्दशी

तिथि का स्वामी - त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है एवं चतुर्दशी तिथि के स्वामी शिव जी है ।

त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है । पौराणिक कथाओं के अनुसार कामदेव, भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के पुत्र माने गए हैं। उनका विवाह प्रेम और आकर्षण की देवी रति से हुआ है। इनकी पूजा करने से जातक रूपवान होता है, उसे अपने प्रेम में सफलता एवं इच्छित एवं योग्य जीवनसाथी प्राप्त होता है। त्रियोदशी को कामदेव की पूजा करने से वैवाहिक सुख भी पूर्णरूप से मिलता है। इस तिथि का खास नाम जयकारा भी है। समान्यता त्रयोदशी तिथि यात्रा एवं शुभ कार्यो के लिए श्रेष्ठ होती है। त्रियोदशी को बैगन नहीं खाना चाहिए ।

नक्षत्र (Nakshatra)- पुनर्वसु - 08 फ़रवरी 00:01 तक तदुपरांत पुष्य

नक्षत्र के देवता- पुनर्वसु नक्षत्र के देवता आदिती (देवमाता ) एवं पुष्य नक्षत्र के देवता वृहस्पति है ।

योग(Yog) - प्रीति - 22:30 तक आयुष्मान्

प्रथम करण : - कौलव - 07:32 तक

द्वितीय करण : - गर - 08 फ़रवरी 05:20 तक

गुलिक काल : - शुक्रवार को शुभ गुलिक दिन 7:30 से 9:00 तक ।

दिशाशूल (Dishashool)- शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही खाकर जाएँ ।

राहुकाल (Rahukaal)-दिन - 10:30 से 12:00 तक।

सूर्योदय -प्रातः 07:04

सूर्यास्त - सायं 18:07

विशेष - त्रयोदशी को बैंगन नहीं खाना चाहिए। (त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र को कष्ट मिलता है और पुत्र की तरफ से भी दुःख प्राप्त होता है।

मुहूर्त (Muhurt) - त्रयोदशी तिथि को राज संबंधी कार्य ( सरकारी कार्य ), व्रतबंध, प्रतिष्ठा, विवाह, यात्रा, भूषणादि के लिए शुभ होते हैं।

"हे आज की तिथि ( तिथि के स्वामी ), आज के वार, आज के नक्षत्र ( नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी ), आज के योग और आज के करण, आप इस पंचाग को सुनने और पढ़ने वाले जातक पर अपनी कृपा बनाए रखे, इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव हीं श्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो "।

आप का आज का दिन अत्यंत मंगल दायक हो ।

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